तनया हिंदी कविता | Tanya Hindi Poem

 

भृकुटी चढ़ा अलंकार सजा आर्यावर्त की तनया चली ।

उद्यत हुई सौदामिनी अंधियारे का अंत करने चली ।।

Hindi poem

मधुकर चले हैं देखने गुलशन में इक नन्ही कली ।

शौक से खण्डित किया जो थी कलिका अभी तक अधखिली ।।


है दर्प जिनके सिर चढ़ा यकीनन करेंगे अश्लीलता ।

निंदनीय कर्मों को देख के भी जागती नहीं ये सोई प्रजा ।।


हैं दायरे जो भूल बैठे वो असभ्यता कर रहे अपार ।

अवसान उनका हो अब अविनीत जो करें व्यवहार ।।


हे अनंता श्री बहुलप्रिया हे दुर्गा बलप्रदा  महाबला ।

कान्ता से अब कान्टा बने ये शोभनीय प्रियनवयौवना ।।


हे गणेश हे विघ्नेश हे हे गजानन हे सिद्धिविनायक ।

कुकर्मियों का अब नाश हो भयमुक्त हो यहां हर सुता ।।


है अमूल्य मानुष उदय दें विचारों को समुचित दिशा ।

सम्मान दें सबको समान हर पल करे विनति निशा ।।

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