मत कर खुदा से अर्जिया कविता | Hindi Poem


मत कर खुदा से अर्जियां,

कर ले तेरी मनमर्जियां।

Hindi poem

डरता रहा खुद वो खुदा 

कुछ मुश्किलों को जानकर,

ना जीत को तू पायेगा

कमज़ोर खुद को मानकर,

तू मुश्किलों से भिड़ यहाँ,

कर ले ज़रा नादानियां।


मत कर खुदा से अर्जियां 

कर ले तेरी मनमर्जियां।


अब बस ज़रा सा देख ले

तेरे अँदर तू झांक कर,

जो मंज़िलों तक जाएँगे 

उन रास्तों को आँक कर,

कर कोशिशें खुद से ज़रा,

ले ढूँढ अपनी खामियां।


मत कर खुदा से अर्जियां 

कर ले तेरी मनमर्जियां।


ना तू गटक अब ये ज़हर

पीछे विजय को छौड़ कर,

ना सोच बच तू जाएगा

नाते जहां से तोड़ कर,

है हारता इस बार गर,

होगी बहुत बदनामियां।


मत कर खुदा से अर्जियां,

कर ले तेरी मनमर्जियां।


माँ जोहती ज्यों बाट के

अब,लौटे बेटा गाँव को,

यूँ जीत का,अब के तेरी

इन्तज़ार है, उस ठाँव को,

जो छौड़ दे,उस छौर तक,

'गहलोत',चढ़ जा सीढिय़ां।


मत कर खुदा से अर्जियां,

कर ले तेरी मनमर्जियां।

- भारत सैनी 'गहलोत'

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