आज का Hindi Urdu Word श्रृंखला में शब्द है "शब-ए-वस्ल"। इसका प्रयोग "अकबर इलाहाबादी (Akbar Ilahabadi) की ग़ज़ल में भी किया गया है। शब-ए-वस्ल का अर्थ थोड़ा विश्लेषण करके समझते हैं। शब का अर्थ रात और वस्ल का अर्थ मिलन होता है। यदि दो उर्दू शब्दों के बीच "ए" का प्रयोग हो तो वहां कई परिस्थितियों में का,के,की का अर्थ प्रकट होता है। इसी आधार पर शब-ए-वस्ल का अर्थ मिलन की रात होगा। 

Urdu words

Akbar Ilahabadi Ghazal In Urdu

आँखें मुझे तलवों से वो मलने नहीं देते,

अरमान मिरे दिल के निकलने नहीं देते।


Aankhein Mujhe Talavon Se Wo Malne Nahi Dete,

Armaan Mere Dil Ke Nikalne Nahi Dete.


ख़ातिर से तिरी याद को टलने नहीं देते,

सच है कि हमीं दिल को सँभलने नहीं देते।


Khatir Se Teri Yad Ko Talne Nahi Dete,

Sach Hai Ki Hamin Dil Ko Sambhalne Nahi Dete.


किस नाज़ से कहते हैं वो झुँझला के शब-ए-वस्ल,

तुम तो हमें करवट भी बदलने नहीं देते।


Kis Naaz Se Kahte Hain Wo Jhunjhala Ke Shab-E-Wasl,

Tum To Hume Karvat Bhi Badalne Nahi Dete.


परवानों ने फ़ानूस को देखा तो ये बोले,

क्यूँ हम को जलाते हो कि जलने नहीं देते।


Parwano Ne Fanus Ko Dekha To Ye Bole,

Kyu Humko Jalate Ho Ki Jalne Nahi Dete.


हैरान हूँ किस तरह करूँ अर्ज़-ए-तमन्ना,

दुश्मन को तो पहलू से वो टलने नहीं देते।


Hairan Hun Kis Tarah Karu Arz-E-Tamanna,

Dushman Ko To Pahlu Se Wo Talne Nahi Dete.


दिल वो है कि फ़रियाद से लबरेज़ है हर वक़्त,

हम वो हैं कि कुछ मुँह से निकलने नहीं देते।


Dil Wo Hai Ki Fariyad Se Labrez Hai Har Waqt,

Hum Wo Hain Ki Kuch Muh Se Nikalne Nahi Dete.


गर्मी-ए-मोहब्बत में वो हैं आह से माने',

पंखा नफ़स-ए-सर्द का झलने नहीं देते।


Garmi-E-Mohbbat Me Wo Hain Aah Se Mane,

Pankha Nafas-E-Sard Ka Jhalne Nahi Dete.

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Conclusion :- आज Hindi Urdu Words में हमने "शब-ए-वस्ल" का अर्थ और इसका प्रयोग अकबर इलाहाबादी की ग़ज़ल (Akbar Ilahabadi Ghazal) में बताया। ऐसे ही उर्दू शब्दों को रोज़ाना हमारी वेबसाइट पर पढ़ते रहें और Share करते रहे।


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