विष्णु सखाराम खांडेकर जी का उपन्यास "ययाति" Best Novel Book Hindi में है। वैसे तो साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हो चुका है, और यदि इतना कारण पढ़ने के लिए पर्याप्त ना हो तो आइए और अधिक परिचय करवाते है।

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जैसा कि लेखक स्वयं इस उपन्यास के लिए कहते है कि समाज में आए पतन, और नैतिक मूल्य की होती हानि के प्रत्युत्तर में इस उपन्यास के लेखन का विचार आया। और इसके लिए पौराणिक कथाओं के ययाति को उन्होंने उपयुक्त पाया। भारतीय परंपरा अनुवाद की परंपरा नहीं रही है, जिसने जिस ग्रंथ से जो सीखा जो समझा उसे अपने अनुसार रचा। ययाति की यह कथा भी पूर्ण रूपेण महाभारत से नहीं ली गई है, अपितु लेखक द्वारा अपनी कहानी के आधार के रूप में ही इसे अपनाया गया है। प्राचीन कथानक के आधार पर लेखक ने अपनी ही कल्पना के भवन ताने हैं।

कथानक की बात की जाए तो वह महान सम्राट नहुष के पुत्र बालक ययाति से प्रारंभ होती है, तथा उसके जीवन के प्रत्येक चरण से होती हुई उसके वानप्रस्थ तक जाती है। अपने जीवन की इस यात्रा में ययाति कई प्रश्नों के उत्तर खोजने के प्रयास करता है, उसका अतृप्त मन पूरे कथा में अपने तृप्ति की पूर्ति हेतु भटकता रहता है। पर ययाति अकेली अतृप्त आत्मा तो है नहीं, उसी के समान यति, कच, देवयानी , शर्मिष्ठा सभी अपने अपने जीवन की उपापोह से ग्रस्त रहते है। जीवन की घटनाएं कब कैसे मोड़ ले लेती है और व्यक्ति कैसे निर्णय लेता है और कैसे जीवन के दलदल में गहरा धंसता जाता है। यह सब इस पुस्तक में बहुत सुंदर तरीके से कहा गया है। अलग अलग चरित्र व्यक्ति के अलग अलग रुप उनकी मनोदशा इत्यादि का वर्णन है यहां। हो सकता है आप स्वयं को किसी चरित्र के पास देखें या थोड़ा थोड़ा हर जगह बिखरा हुआ पाएं। मानव मन की चंचल प्रवृत्ति, भाग्य का विचित्र खेल, इन खेलों से बना मनुष्य का व्यक्तित्व अद्भुत रूप से दर्शाया गया है।

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पुस्तक की पृष्ठ संख्या 300 से अधिक है। और कहीं कहीं कथा की गति अत्यंत धीमी लगती है परंतु यही गति कथा के साथ न्याय कर सकती थी। मूल रूप से मराठी में लिखे गए इस उपन्यास का अनुवाद भी अच्छा है। भाषा शुद्ध तत्सम शब्दों से सज्जित है जो देश-काल के अनुसार उचित ही लगती है। 

अब रही बात की इसे पढ़ना किसके लिए अधिक रूचिकर होगा तो जिसने गुनाहों के देवता के कथानक में आनंद लिया हो हर बदलते पृष्ठ पर अपनी सहानुभूति बदली हो, उन्हें यह पुस्तक बहुत पसंद आएगी। मानव की विभिन्न मनोवृत्ति या मानव मन के चिर प्रश्नों के साथ मानव का अनंत द्वंद्व पढ़ना आपको पसंद है तो यह पुस्तक आपकी प्रतीक्षा में है। पर यदि आप नये पाठक है, सरल रोमांचित करने वाली कहानी की तलाश में है तो थोड़ा रूक जाएं और समय ले अन्यथा प्रबल संभावना है कि आप इसे अधूरी छोड़ देंगे।

आज हमने विष्णु सखाराम खांडेकर जी के उपन्यास "ययाति" Best Novel Book Hindi में है, उसके बारे में जाना। एक बार आप ऊपर दिए लिंक पर जाकर इस novel book को खरीदके जरुर पढ़ें।

- श्रीवत्स मालवीय

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