नमस्ते दोस्तों, आज हम आपके लिए ‘‘गजल में बहर का Use कैसे करें‘‘ का पार्ट 2 लेकर आए हैं। इससे आप ये समझ पाएंगे कि आपको गजल कैसे लिखनी है। कई रचनाकार पिछली पोस्ट को पढकर कमेंट कर रहे हैं, कि उन्होंने कहीं सुना है कि गजल को केवल तर्ज के आधार पर भी लिखा जा सकता है। एक गलतफहमी के चलते आप कहीं गजल विधा से ना भटक जाए, इसलिए इस पोस्ट को जरूर पढिए।

हमने जब पिछली पोस्ट में बताया कि आपको गजल लिखने के लिए बहर का Use करना है, तो आपको तक्तीअ करना आना चाहिए। ये जानकर कई रचनाकार ने ये कहा कि केवल किसी गजलकार की तर्ज लेकर भी गजल कही जा सकती है। तो मैं आप सभी से कहना चाहूंगा कि गजल के लिए तक्तीअ करना आना चाहिए। इसके पीछे भी एक तर्क है। अब ये तर्क आखिर क्या है आपको नीचे दिए गए विडियो में जानने को मिलेगा -


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