आप सभी लेखकों और कवियों का आज की पोस्ट "गीतिका छंद क्या है और गीतिका छंद कैसे लिखें" में स्वागत है। कई बार आपमें से कई रचनाकारों ने पूछा है कि गीतिका छंद क्या होता है और इसे कैसे लिखा जाता है, इसके बारें में जानकारी दी जाए। हमने हमारे प्लेटफाॅर्म पर सभी विधाओं की जानकारी शेयर की है, तो ये बाकि क्यों रहे। चलिए जानते हैं कि गीतिका छंद आखिर है क्या और आप इस पर काम कैसे कर सकते हैं।

दोस्तों गीतिका छंद नाम से ही पता चल रहा है कि ये एक प्रकार का हिंदी गेय छंद है। ये बात आप भी भली भांति जानते हैं कि हिंदी छंदों का अस्तित्व उनके नियमों से बनता है। इसीलिए गीतिका छंद को समझने के लिए हमें इसके नियमों की ओर ध्यान देना होगा -

1. गीतिका छंद में चार चरण या पद हुआ करते हैं। यदि आपने कोई गीतिका छंद पढ़ा है, तो आपने भी गीतिका छंद में चार चरण जरूर देखे होंगे।
2. चार पदों के अलावा आपको ये भी जान लेना चाहिए कि ये एक सम-मात्रिक छंद होता है। कहने का अर्थ है चारों पंक्तियों में समान मात्राएं होती है।
3. यहां चारों पंक्तियों में आप अपनी मन मर्जी से मात्राएं नहीं रख सकते बल्कि इसके हर चरण या पद में कुल 26 मात्राएं होना अनिवार्य है।
4. 26 मात्राएं भी आप सीधे तौर पर नहीं रख सकते बल्कि हर चरण या पद में 14-12 या 12-14 पर यति रहती है।
5. हर चरण या पद के अंत में लघु-गुरु होना अनिवार्य होता है।
6. इस छंद में कई बार गुरु विखडिंत होकर लघु-लघु में परिवर्तित हुए मिल सकते हैं।


7. इस छंद के हर चरण में समतुकांत हो सकता है या दो-दो पदों में हो सकता है।
8. जैसा कि आप भी जानते हैं गीतिका छंद एक प्रकार का गेय छंद है। इसकी गेयता को मधुर बनाने के लिए कहा जाता है कि इसके हर चरण या पद में तीसरी, दसवीं, सतरहवीं और चैबीसवीं मात्रा लघु होनी चाहिए। यानि एक मात्रा भार वाली होनी चाहिए। इसके अलावा जो भी मात्रा हो वो गुरु होनी चाहिए।
9. अगर हम लघु-गुरु को गेयता या मात्रा विन्यास के अनुसार व्यवस्थित करें, तो आपको एक पूरा मीटर मिल सकता है।

जैसे - गुरु लघु गुरु गुरु गुरु लघु गुरु गुरु गुरु लघु गुरु गुरु गुरु लघु गुरु।

इस मीटर में आप गुरु को 2 और लघु को 1 मान सकते हैं। इस आधार पर भी हम आपको मात्रा विन्यास बता देते हैं -

212 221 222 122 212 

आपको कई बार ये 2122 2122 2122 212 लिखा मिल सकता है। आपको बता दें कि ये गज़ल विधा का भी एक मीटर है। लेकिन हम हिंदी छंद में इस मीटर को चार गणों में ना लिखकर के तीन गणों में ही लिखते हैं। इसी प्रकार लौकिक छंदों के सूत्र के अनुसार ये निम्नलिखित होगा -

रगण तगण मगण यगण रगण

अब हम इस छंद का एक उदाहरण समझ लेते हैं, ताकि आप अच्छे से विष्लेषण करके समझ पाएं। कवि रामनरेश त्रिपाठी की एक रचना इसका एक बेहतरीन उदाहरण सिद्ध होता है-

हे प्रभो! आनन्द दाता, ज्ञान हमको दीजिए,
शीघ्र सारे दुर्गुणों को, दूर हमसे कीजिए।
लीजिए हमको शरण में, हम सदाचारी बनें,
ब्रह्मचारी धर्मरक्षक, वीर व्रत-धारी बनें।


इस उदाहरण में आप स्वयं एक बार ध्यान केंद्रित करें आपको लगेगा कि हर चरण में जहां यति चाहिए वहां पर 14,12 मात्राएं व्यवस्थित हो रही है। साथ ही बोलने में भी आपको प्रतीत हो जाएगा कि यहां यति चाहिए जैसे हे प्रभो! आनन्द दाता। इसमें मात्राएं 14 है और ये एक बोलने में लग रहा है कि ये अपने आप में पूरा है। इसीलिए आप भी इस बात को जरूर ध्यान में रखें।

तो दोस्तों, आज कि ये पोस्ट आपके लिए भी जरूर अलग और सहायक रही होगी। आज हमने आपको "गीतिका छंद क्या है और गीतिका छंद कैसे लिखें" इसके बारें में बताया। हमने गीतिका छंद उदाहरण सहित पूरी जानकारी के साथ देने का प्रयास किया है। अगर आपको ऐसी ही जानकारियां और जाननी है या आप लिखने में रुचि रखते हैं, तो आप उपर दिए गए विडियो पर क्लिक करके हमारे यूट्यूब चैनल पर जरूर आएं।

- योगेन्द्र ‘‘यश‘‘

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