Avoiding Suicide Hindi Poetry - युवाओं भटक न जाना

उम्र क्या अभी देशहित में कई फ़र्ज़ है बाकि,
जिसने पाला मां बाप का भी कर्ज़ है बाकि,
मां, पत्नी, बच्चों को भूल लटक न जाना,
हार चुके को देख युवाओं भटक न जाना।

ऊंची छत से तुमको केवल काल दिखेगा,
पीछे मुड़कर देखो बाद का हाल दिखेगा,
काल को न्यौता दे छत से छटक न जाना,
हार चुके को देख युवाओं भटक न जाना।

Suicide Avoide Poem In hindi

तुम युवा हो और यौवन है उर्जाकाल,
कोशिश से मिलती इसमें मंज़िल भी हर हाल,
जीवन की बाधा से तुम कभी अटक न जाना,
हार चुके को देख युवाओं भटक न जाना।

हर बाधा का हल है ये अमृत सा है,
फिर सोचते क्यों जीवन ये मृत सा है,
अमृत छोड़के घूंट ज़हर की घटक न जाना,
हार चुके को देख युवाओं भटक न जाना।

उम्र तुम्हारी बोझ फ़र्ज़ का ढोने की,
और बच्चों की उम्र अभी खिलौने की,
छोटे कंधों पर बोझ को पटक न जाना,
हार चुके को देख युवाओं भटक न जाना।

- कवि योगेन्द्र "यश" 

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