केरल में हुई हथनी के साथ घटना पर कविता 

ना हथनी ना उसके बच्चे का इसमें कोई दोष रहा,
और बारूद भी ज़रिया बनकर क्यों सोचो निर्दोष रहा,
क्योंकि इसमें दोषी वो सब जिसने ये कुकर्म किया,
पढ़े लिखे इंसान नहीं वो जिसने ये अधर्म किया,

Hathni par kavita

अनानास में बारूद भर के जीव से छल कर बैठे हैं,
कब तक पाप करेंगे ये तो घड़ा पाप का भर बैठे हैं,
भूख दिखी न दिखा गर्भ में पलता बच्चा उनको,
हथनी तड़पी पर न दिखा तड़पता बच्चा उनको,

अरे हमारे महाराणा ने रामप्रसाद को पाला था,
एक पशु था लेकिन स्वामिभक्ति का रखवाला था,
उसने अकबर के सामने प्राण स्वयं ने त्यागे थे,
देख स्वामीभक्ति उसकी सोए शत्रु जागे थे,

ऐसे ऐसे पशु हुए जो इंसानों से ऊपर है,
और फिजूल ही समझ रहे हो हम ही केवल सुपर है।

- कवि योगेन्द्र "यश"

4 Comments

  1. एक मां जो किसी का मां +सा+ +आहार बन गई ...🙏😔


    बोलो क्यू न डरू , बिना मौत जो मै मरू , जान बचाने के लिए क्या मैं करू ,


    जंगल ,शहरों कहा जाऊ जहां, कैसे मैं खुदको बचाऊ ,

    हूं चाहे नन्ही कली या बनी मां अंदर मेरे नन्ही सी जान पली ,

    कभी जीभ तो कभी पूरा जलते , कभी स्वाद तो कभी मज़बूरी के नाम पर खा जाते है ,

    अपनी मां को महान और मुझे खाना बताते है , मै भी तो किसी की मां हूं तो मुझे क्यू सताते है, मुझे क्यू नहीं प्यार जताते है , मुझे भी उतना ही दर्द होता है क्यू नहीं समझ पाते है , 🙏

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  2. सवाल :- आपके ,,,
    जवाब :- दरिंदे के ,,,

    सवाल :- आवाज़ आयी मां थी वो ?
    जवाब :- बोला तो , हो मां वो जिसको तुमने मारा वो ??

    सवाल :- तो बकरी ही तो थी वो ? , खाने के लिए ही तो होती है वो ...

    जवाब :- जिंदा तो थी वो , दुखी वो भी थी मारने से तो , चाहे छोटी ही सही हो ...

    सवाल :- कसाई की गलती बताई , उसके मारने से मेरी थाली में अयी , खाना की मज़बूरी बताई ,
    वही खाया डाॅक्टर ने जिम वाले ने लिखवाई , कभी मुर्गी तो कभी बकरी भाई ...

    जवाब:- तो क्यों मुझे कोसते हो , दरिंदे तो तुम भी हो ,

    मुझे क्यों गलत सोचते हो , तुम भी तो स्वाद के लिए नोचते हो किसी की मां का मांस नोचते हो .... 🙏

    एक शांति और एक सवाल आपके लिए :- गलत में था या वो , एक बार खुद दे कहो ????????

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  3. इंसान


    दुख दिखा रहे हैं , नहीं रही वह उसका शोक जता रहे हैं ,

    दुख , दुख बहुत हैं लोगों को बता रहे हैं कुछ तो इनमें वही है जो दूध देने वाली मां को 🐄 को खा रहे हैं ,

    भाई किस बात का गम है , बस इस मां की की ऊंचाई थोड़ी कम है ,

    उसको 🐄 खा जाते हो तो इसको 🐘 भी खा जाओ ,

    यार दर्द से आंखें होती उतनी ही नम है , तो क्यों दिखावे का झूठा यह गम है 🙏

    जिसने दिया उस मां के मुंह में बम, तू भी उससे नहीं काम है , बस यह भ्रम है :- कि वह बम वाला हाथ तेरा नहीं , मां (🐄 , 🐐 ) काटने वाला हाथ मेरा नहीं..... 🙏😔

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  4. बुरा लगा सुनके कि वह नहीं रही, बस इतनी सी गलती थी इंसान को समझ बैठी थी वह सही ,

    मजबूर थी भूख चूर चूर थी , गर्भ में उसके पल रही एक नूर थी ,

    निकल पड़ी सड़कों पर इंसान की इंसानियत आजमाने को गलती करी मांग बैठे कुछ खाने को , खाने में जानवर की इंसानियत इंसान की हैवानियत नजर आई , अनानास दिया उसमें आतिशबाजी थी लगाई, जल गया मुंह नहीं ,वह उस जानवर से लड़ी , इंसानियत थी उसमें चुपचाप रही पानी मे वह खड़ी ...

    बुरा लगा सुनकर नहीं रही हो, बस दुआ इतनी इंसान ना पैदा हो।
    🙏

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