नारी पर कविता | हिंदी कविता नारी पर | Poem On Nari In Hindi


नमस्ते दोस्तों, आज हम नारी पर कविता लेकर आये हैं, जिसे हमारी रचनाकार अंजली जी ने लिखी है। उम्मीद है ये Poem On Nari आपको जरूर पसन्द आने वाली है। आप इसे पढ़ने के साथ साथ इसे Video के रूप में भी हमारे चैनल के नीचे दिए गए वीडियो में सुन सकते हैं।

अब कितनी और धूर्त क्रीड़ा होगी .....
कितनी द्रोपदियो को पीड़ा होगी .....
क्या दुर्योधन युँ ही ताल को ठोकेगा ....
क्या दुस्सासन को न कोई रोकेगा....2
क्या युँ ही खाक होगी नन्ही जगमग-सी बाती ..
क्या युँ ही आघात होगी हर इक माँ की छाती...
क्या भारत वंश के राजा युँ ही अँधे होगें...
क्या हरबार भीष्म प्रतिज्ञाओ से बँधे होगें...2

क्या युँ ही आँचल होगा दुष्टो के पंजो मे....
नीति दम तोड देगी अनीति के शिकंजो में....
 मौन से क्या इज्जत तार- तार नहीं होगी ....
दुष्कर्मी पुत्रो से क्या माँ शर्मसार नहीं होगी ....2

क्या कौरव अब मंशा पूरी कर जाएंगे ......
लाज बचाने की खातिर केशव न आएंगे......
प्रतिशोध की खातिर धर्म युद्ध भी हो जाएँगे.....
पर बोलो जो खोया वो क्या लौटा पाएँगे.....2

कब तक अज्ञानी नाचेगा ज्ञानी दरबारो में......
क्या सिर्फ खबर छपेगी कल के अखबारो में.....
क्या कलियाँ मुरझाएंगी अपने ही बागो में .....
कब नारी शस्त्र ऊठाएगी अपने ही  हाँथो में ......2


क्या कोयल के स्वर भी बन्धित रह जाएंगे ......
ओज शब्द भी क्या अश्रु बन बह जाएंगे.......
कब तक घायल होगी इल्जामो उर तंजो से.......
कब छुटकारा पाएगी वो रावण के प्रपंचो से ........2

 क्या सीता को फिर तिनके पर अडना होगा ....
स्वाभिमान की खातिर खुद ही  लडना होगा.......
गर ऐसे ही नारी का सम्मान नही होगा,.......
तो भारत का स्वर्णिम इतिहास नहीं होगा.....2
                      
 - अँजली

तो प्यारे हिंदी कविता के पाठकों आज हमने नारी पर कविता पेश की है। वाकई नारी की पीड़ा को व्यक्त करती और नारी सशक्तिकरण पर ये कविता बहुत अच्छी लगी। आपको कैसी लगी और आपके क्या विचार हैं, ये हमें Comment Box में ज़रूर बताएं। 

2 Comments

  1. जिसे अपने बना कर रखो अक्सर दिल में जख्म वही देते हैं
    आज के जमाने में अपने कौन समझते हैं जब मुसीबत आती है तो सब गलतियां कबूल कर लेते हैं
    यू गुस्सा हो या ना करो बात बात पर हर किसी से रिश्ते बनाया करो उन्हें खोया ना करो बात बात पर

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  2. अजनबी हूं इस शहर में चेहरे पर एक मुस्कुराहट लेकर चलता है आंसुओं की हम क्या बात करे अक्सर मुस्कुराहट तो चेहरे पर एक बार आ जाती है हर वक्त तो दर्द ही मिलता है अमीरों का दर्द तो पैसों से बट जाता है हम गरीब हैं जनाब हमारा दिन तो खाली पेट ही कट जाता है अपनी गरीबी हम दूसरों से क्या बताएं हम तो हाथ में कलम लेकर लिख देते समझती वही है जो गरीबी का एहसास कर लेते है

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