Inspirational Short Story In Hindi - किसी आचरण को कैसे पहचाने

आज मैं आपके लिए आचरण पर एक प्रेरक प्रसंग हिंदी में लेकर आया हूं। उम्मीद है ये प्रेरक कहानी आपको inspire करके रख देगी।

एक समय शिष्य अपने गुरू से कहता है कि हे गुरूदेव! किसी के आचरण का पता कैसे करें? एक समय के लिए गुरूदेव भी सोच में पड जाते हैं। उस वक्त वो बगीचे में पौधारोपण कर रहे होते हैं। आप तो जानते ही होंगे कि गुलाब की तरह कई ऐसे पौधे होते हैं जिन्हें कलम करके लगाया जाता है। गुरूदेव भी वही कार्य कर रहे होते हैं। तभी गुरूदेव शिष्य को दो कांटे की डंडीयां यानि कलम देकर कहते हैं कि ये लो शिष्य मैं तुम्हे दो गुलाब की कलम दे रहा हूं। तुम इन दोनों को लगाकर प्रतिदिन इन्हें पानी देना और जब तक इन्हें फूल पत्तियां ना आ जाए तुम मेरे पास मत आना। शिष्य उन्हें लेकर चला जाता है और वो उन्हें रोपकर रोजाना उन्हें पानी पिलाता है।




बहुत दिन बीत जाने के बाद शिष्य घबरा जाता है कि गुरूदेव ने ये कैसा काम दे दिया। इससे तो मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा कि किसी के आचरण को भला ऐसे कैसे परखा जा सकता है। वो परेशान होकर गुरूदेव के पास चला जाता है। गुरूदेव के पास जाकर वो ये बात साझा करता है कि अभी तक तो कुछ वो समझ ही नहीं पाया है। गुरूदेव उसे कहते हैं कि मैंने तुम्हें कहा था ना कि जब तक उन कलम पर पत्तियां ना उग जाए तुम मेरे पास मत आना। जाओ और तब तक मेरे पास ना आना जब तक की तुम उन पर पत्तियां या फूल ना देख लो। शिष्य वहां से चला जाता है और एक दिन ऐसा आता है जब उन पे फूल और पत्तियां आना शुरू हो जाती है। शिष्य देखता है कि एक कलम पे गुलाब की पत्तियां आ रही है और दूसरे पे बस कांटे ही हैं।

ये देखकर वो गुरूदेव के पास जाकर कहता है कि हे गुरूदेव! आपने तो कहा था कि मैं तुम्हें दो गुलाब की कलम दे रहा हूं बल्कि उनमें तो केवल एक ही गुलाब है दूसरा तो कांटे की कलम है। आपने मुझसे ये झूठ क्यों बोला? गुरूदेव मुस्कुराते हुए कहते हैं ताकि तुम समझ पाओ कि हम किसी के बाह्य रूप को देखने मात्र से ही किसी का आचरण पता नहीं कर सकते। बल्कि किसी का आचरण पता करने के लिए उसके आंतरिक गुणों का पता करना जरूरी होता है। जिस प्रकार इन कलम को तुमने पहले देखा तब तुम ये नहीं पता कर पाए कि इनमें से एक ही गुलाब है और जैसे जैसे इन्होंने इस प्रकृति में अपना आचरण प्रदर्शित किया तभी तुम समझ पाए। बस यही बात मैं तुम्हें समझाना चाह रहा था कि किसी का आचरण उसके आंतरिक गुणों के आधार पर पता किया जा सकता है।

तो हिंदी कहानी के पाठकों आज मैंने मेरे द्वारा लिखा गया एक प्रेरक प्रसंग प्रस्तुत किया। ये एक छोटी प्रेरक कहानी आपको कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताएं।

- लेखक योगेन्द्र जीनगर ’’यश’’

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