Corona से बचाव के लिए Lockdown पर दोहे | हिंदी दोहे 


असुर की भांति देश में, कोविड की ललकार।
जीतेंगे इस युद्ध में, लोक संग सरकार।।

हम तुम घर में बैठ कर, सभी लड़ रहे जंग।
कैसा कलयुग आ गया, अलग हो गए ढंग।।

हमसे थोड़ा दूर हो, इसका है अफ़सोस।
हम तुम बन्दी है नहीं, भुगत रहे निर्दोष।।

कहते बैठे जेल में, हम अपनो के संग।
घर को ऐसा कह रहे, जग ने बदला रंग।।

चाहे अब रहना पड़े, घर में कुछ दिन और।
बस ऐसे ही बच सके, अब सांसों की डोर।।


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बिना लगाए क्रीम ही, बदल रहा है रंग।
पर दिक्कत ये हो गई, ना है कोई संग।।

अपनी सेवा कर रहे, ना हो हम से तंग।
घर में बैठे लड़ रहे, असली वही दबंग।।

कुछ ऐसे भी लोग हैं, उड़ा रहे अफवाह।
शायद उनको है नहीं, अपनो की परवाह।।

माना जन कुछ है दुःखी, खाली जिनका पेट।
ज्यादा उनसे है दुःखी, बढ़ा रहे जो रेट।।

कैसे अपना ध्यान दें, जो मिलता वो चंद।
इतना पैसा है नहीं, कहे ज़रूरतमंद।।

- कवि योगेन्द्र "यश", राजसमंद, राजस्थान 


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