हिंदी कविता के चाहने वालो आज हम बेटी पर कविताएं लेकर आये हैं। ये कविताएं हमारे रचनाकार की स्वरचित है। इन्हें पढ़कर share करें और हमारे रचनाकार को Motivate करें।

बेटी को भी है जीने का अधिकार 

कि क्या दु मै तुमको प्रूफ,
बेटीयां तो होती है धरती पर परियो का रूप।
बिना पंख की पंछी होती है बेटीयां,
आसमां छूने की हिम्मत रखती है बेटीयां।
जिसको मिल जाये कर दे उसका जीवन साकार,
बेटी को भी है जीने का अधिकार।

घर की रौनक होती है बेटीयां,
जहा उजाला कम हो,वहा चांद-तारो सी चमक होतीहै बेटीयां
यें बेटीयां करेंगी ऐसा काम,
गर्व से उच्चा होगा तेरा नाम।
बेटी का जन्म भी होता है चमत्कार,
बेटी को भी है जीने का अधिकार।

कि अगर बेटीयों को कोख मे ही मारोगे,
इनकी बद्दुआ है तुम नर्क मे जाओगे।
जो बेटो से न होए वो भी करती है बेटीया,
सुना अब सरहदो पर भी लडती है बेटीया।
बेटी न मांगती दहेज न धन-संपत्ति न कोई कार,
बेटी को भी है जीने का अधिकार।

- प्रकाश देवासी

दर्द होता है माँ


बेटों की तरह मैं भी आप की कोख में आती हूं,
पर फर्क सिर्फ इतना है,
की बेटे तो जन्म ले लेते हैं,
पर मैं कोख में ही मर जाती हूं ।

क्या बेटों के ही आने से ही खुशियां आती हैं,
क्या बेटे ही आपकी नजरों को भाती हैं ,
शायद इसीलिए मां ,
इस दुनिया में लाखों बेटियों को,
जन्म लेने से पहले ही मार दी जाती हैं ।

जब कोख में मैं रहूं या बेटा रहे ,
तो बेटे के होने से खुशी के,
और बेटी के होने से दुख के आंसू बहते हैं,
आपका बेटा तो मर्द होता है मां ,
पर हमें जब कोख में ही मार दिया जाता है ,
तो हमें भी दर्द होता है मां।

जब रोते-रोते मैं इस दुनिया में आती हूं,
पापा दादी की नजरों को न भाती हूं ,
किसी को खुशी नहीं होती बस मैं ही रोए जाती हूं ,
जब जी भर के रो लेती हूं ,
फिर अपनी आखरी नींद सो जाती हूं ,
और माता पिता का प्यार क्या होता है ,
उसको जान ही ना पाती हूं,
मां आप दूध पिलाओ तो कर्ज होता है ,
पर हमें दूध पीने से ही पहले मार दिया जाता है ,
तो हमें भी बहुत दर्द होता है ।

मुझसे ही आप हो मुझसे ही दुनिया जमाना है ,
बेटियां ही घर संभालती हैं ,


मर्दों को तो बस कमाना है ,
आज सभी को बहू चाहिए ,
पर बेटियों को कोई जन्म नहीं देना चाहता
कैसा ये जमाना है ,
कर्म तो सभी को करना है
पर कन्यादान का पुण्य किसी को नहीं कमाना है।

- योगेश सुमन

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