Beti Padhao Quotation

Beti padhao kavita

महकती खुशबू भी रस्ता ढूंढ़ रही है,
जो भी मिले सस्ते से सस्ता ढूंढ़ रही है,
जब से सुनके आई है बेटी पढ़ाओ,
मेरी बिटिया तब से अपना बस्ता ढूंढ़ रही है।

- कवि योगेन्द्र "यश"

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