Teachers Day Speech | शिक्षक दिवस पर भाषण

आज की इस पोस्ट में हम "Teachers Day Speech" और "शिक्षक दिवस पर भाषण" लेकर आए हैं। शिक्षक दिवस पर आप सभी की मांग थी कि एक ऐसा लेख लिखा जाए जो आपको आपके school में teachers day के अवसर पर speech बोलने में काम आ सके। इसीलिए आज ये लेख खासतौर पर वक्ताओं के लिए लिखा जा रहा है।

शिक्षक दिवस एक ऐसा दिवस जिस दिन हर व्यक्ति अपने गुरु के गुणों का अनुसरण करने का प्रयास करता है। ऐसा होना भी चाहिए, क्योंकि गुरु एक ऐसी शख्सियत होती है जिसमें एक सकारात्मक ऊर्जा होती है। वही सकारात्मक ऊर्जा देश का भावी भविष्य बनाने में सहायक होती है। कभी आपने सोचा है कि यदि शिक्षक इस दुनिया में ना होते तो क्या होता? अगर नहीं सोचा है, तो एक बार सोचके जरूर देखना ताकि अगली बार आपको ये speech वाली पोस्ट पढ़ने की जरूरत ना पड़े।

Teachers day par bhashan

बच्चों का चरित्र भले ही अंदर से कैसा भी हो, लेकिन एक शिक्षक ही होता है, जो उसे उत्तम के नज़रिए से देखता है। कई बच्चों को देखा है, जो कुसंगति में पड़कर विद्यालय में शिक्षकों का अपमान कर बैठते हैं, लेकिन शिक्षक अपमान सहने के बाद भी उन्हें कुसंगति में छोड़ना सही नहीं समझता बल्कि उसे सुधारने का प्रयास करता है। कई लोगों को कहते सुना है कि यदि ये इस पद हेतु अध्ययन करवा रहा है, तो ये खुद क्यों इस पद को प्राप्त नहीं कर पाया या ये खुद क्यों नहीं ये बन गया। जब एक इंसान ऐसा सोच ले, तो समझ लो कि उस व्यक्ति के मस्तिष्क और हृदय में वो ताकत ही शेष नहीं है कि वो गुरु के महत्व को समझ पाए।

मुझे कई शिक्षकों ने पढ़ाया और अच्छी शिक्षा दी। उनकी दी हुई शिक्षा से आज मैं एक लेखक और कवि हूँ। इसका मतलब ये नहीं कि वो भी कवि या लेखक रहे हो। शिक्षक अपने शिष्यों को ज्ञान ही ऐसा देता है, जो उसे कुछ नया करने में और इस समाज में अपना एक स्थान बनाने में सक्षम बना सके। एक शिक्षक की दी हुई शिक्षा से हम अपने लक्ष्य को खोज पाते हैं और वहां तक पहुंच पाते हैं। शिक्षक तो वो ऊर्जा है या वो ताकत है जो हमें अपनी ताकत को पहचानने में हमारी मदद करती है।

शिक्षक के प्रति जो गलत नज़रिया है, उसे बदलना होगा। किसी भी इंसान को ऐसा नहीं है कि सबकुछ आता होगा। हर इंसान ताउम्र सीखता है और कुछ न कुछ सिखाता है। हम सभी ईश्वर के द्वारा गए ऐसे प्राणी है, जिनकी प्रकृति ही सीखना है। जब तक जिएंगे, तब तक हम सीखेंगे और सिखाते रहेंगे। जहां से हमें कोई ज्ञान मिले वो गुरु होता है और आप सभी मेरे गुरु हैं, क्योंकि मैं आप सभी से सीखता हूँ। मुझे आप सभी से इतना ज्ञान प्राप्त होता है कि वो क्रमबद्धता से शब्दों के रूप में बाहर आकर एक रचना का रूप ले लेता है।

आज शिक्षक दिवस पर यही मन के भाव हैं कि जितना सीखा है, उसपे अहंकार तो नहीं पर हां इतना मन में दृढ़ निश्चय जरूर है कि मैं उसे एक आकार दे पाऊं। आप सभी का आभार व्यक्त करता हूँ जो आप मेरे लक्ष्य प्राप्ति में मुझे इतना सहयोग करते हैं। धन्यवाद

- लेखक योगेन्द्र "यश" 

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