Teachers Day Poem In Hindi | Teachers Day

शैतानों को हैवानों को, 
जिसने बदल दिया इंसान में,  
बिगड़े हुओं को सुधारा जिसने,
जिसकी तुलना हुयी भगवान से। 

मूर्खो को विद्वान बनाया, 
जिसने जीवन का अर्थ समझाया, 
वह गुरु ही है कोई और नहीं, 
जिसने धरती को ही स्वर्ग बनाया। 

ज्ञान का प्रकाश फैलाना,
लोगों में परिवर्तन लाना, 
वे करते कोई साधारण काम नहीं, 
क्यों जग में उनका नाम नहीं। 

Teachers day poem

ज्ञान का जिसमे सागर है,
जिसने देखे है सपने प्रगति के, 
जो रोके हमें गलत राह पर जाने से, 
वह बचाते है बुरी संगति से। 

ज्ञान से हमें बचाया गुरु ने,
जिस दलदल में था संसार फंसा, 
गोविंद के समान गुरु है, 
उनके मन में है सारा ब्रह्माण्ड बसा। 

मधुर उनकी वाणी है, 
वे संत नहीं वे ज्ञानी है, 
एक गुरु बनना आसान नहीं,
क्यों जग में उनका नाम नहीं। 

जिसके शिष्य बने महान विश्व में,
क्यों गुरु उसके अनजान है, 
वो  जीते है साधारण जीवन, 
वो गुरु के भेष में भगवान है। 

सदा हमारा भला जो चाहे,
वे सख्त है पर कठोर नहीं, 
जो मानवता का पाठ पढ़ाये, 
वह गुरु ही है कोई ओर नहीं। 

वे जीने की कला सिखाते हैं, 
वे आगे बढ़ते जाते हैं,
वे करते कभी विश्राम नहीं,
क्यों जग में उनका नाम नहीं। 

उनसे शांति है संसार में,
उनसे मानव में मानवता है, 
गुरु ने पवित्र किया लोगों के मन को,
उनके कण-कण में पवित्रता है। 

पहले गुरु ही आते है,
फिर आते है भगवान, 
जो गुरु के मार्ग पर चलता है,
वह बनता है महान। 

जिसने कभी भी अपने ज्ञान पर,
शिष्यों के प्रति बलिदान पर, 
किया कभी अभिमान नहीं,
क्यों जग में उनका नाम नहीं।

विद्या को अपना शस्त्र बनाकर,
करते है अज्ञानता का संघार गुरु, 
हाथ में लिए मशाल ज्ञान की,
मिटाते हैं जीवन से अंधकार गुरु। 

उन्हें आचार्य कहो या शिक्षक, 
उन्हें गुरु कहो या अध्यापक, 
उन्हें चिंता हैं अपने शिष्यों की, 
वे है सृष्टि के शुभचिंतक। 

वे उमंग के खिलते नीरज हैं, 
वे उत्साह के उगते सूरज हैं , 
उम्मीदों की ढलती हुई शाम नहीं,
क्यों जग में उनका नाम नहीं।

- यश कुमार

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