मातृ भाषा हिंदी | हिंदी कविता

बड़ी मुश्किलों के बाद 
धूप से हट कर
छांव में खड़ी हुई थी मैं
तब किसी बड़े साहित्यकार ने 
मुझे पनहा दी
जिसकी कलम के जरिए
पलकर बड़ी हुई थी मैं
काफी बरसों के बाद
आज फिर से
अपनी कलम से
होकर बेगानी

Hindi kavita

एक बिना रोशनी वाले
कमरे में
क्षतिग्रस्त होकर
ज़मीं पर पड़ी थी मैं
क्योंकि सभी ने अब अंग्रेजी 
को दिया सहारा
छोटे छोटे बच्चों ने भी
अंग्रेजी बोलना शुरू किया है
आज समझ में आया
इस अंग्रेजी के बाद
मेरा वजूद क्या है
इसीलिए शायद एक बार फिर
उसी तपती धूप में 
अकेली तन्हा खड़ी थी मैं।
आपकी मातृ भाषा हिंदी।

- मोनी शर्मा

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