Hindi Diwas Par Kavita | हिंदी दिवस कविता 

हिंदी का अस्तित्व बचाना ये कर्तव्य हमारा है,
इसका है अस्तित्व जहां पर देश वो सबसे प्यारा है,

क्यों भूलते हो हिंदी को हिंदी से तुम बड़े हुए,
हिंदी से ही पढ़ लिखके तुम पांव पे अपने खड़े हुए,

hindi diwas poem

इस भाषा में जन्मे हम और जीवन इसमें बीता है,
जिसने समझा इसका मूल्य वो हिंदी को जीता है,

न हिंदी केवल है विषय न हिंदी केवल भाषा है,
ये राष्ट्र के नव निर्माण की जगी हुई एक आशा है,

जो इंग्लिश से अहम करे वो इसकी करता निंदा है,
हिंदी से है राष्ट्र हमारा इससे संस्कार जिंदा है,

कई हुए हैं इससे ज्ञानी कोई इससे बलवान हुआ,
इस भाषा की देन है जिसमें साकेत और गोदान हुआ,

काव्य गद्य का रूप निहारे हिंदी एक आधार है,
हिंदी में शृंगार झलकता और झलके अंगार है,

इसमें नौ रस छंद अलंकार व्याकरण का ज्ञान है,
हिंदी देती इतना कुछ ये हिंदी बड़ी महान है,

मान सको तो मान लो ये राष्ट्र की रक्षक हिंदी है,
सब कुछ ज्ञान कराने वाली अपनी शिक्षक हिंदी है।

- कवि योगेन्द्र "यश"

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