गांधी जयंती पर कविता | Gandhi Jayanti Par Kavita 

स्वदेश को दिया बढ़ावा,
दूर रखते थे क्रोध का लावा,

हिंसा के विरोध में थे वो,
आजादी के शोध में थे वो,

लोगों से रखते थे स्नेह,
न इस बात में है संदेह,

Gandhi jayanti poem

कुछ अलग स्वभाव था उनका,
मानवता का भाव था उनका,

स्वदेश से प्रेम करने को कहते थे,
राष्ट्रहित के लिए समर्पित रहते थे,

बिना शस्त्र के लड़ने वाले,
सत्य पथ पर चलने वाले,

कठिनाइयों में आस रखने वाले आशावादी थे,
महान आत्मा वो हमारे गांधी थे,

जब हमारे देश में अपने अधिकार छीनने लगे,
वो होके सतर्क अपने वास्ते लड़ने लगे,

ट्रेन से बाहर करके जब उनका अनादर कर दिया,
उन्होंने उन अंग्रेजों को ही देश से बाहर कर दिया,

क्रोध के मसलों को स्नेह से चुटकी में सुलझाए हैं,
इस देश में ऐसे शख्स राष्ट्र भक्त कहलाए हैं।

- कवि योगेन्द्र "यश" 

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