तेरा साथ : एक रचना

जिंदगी मै साथ तेरा इसलिए पाता रहा,
गीत तूने जो सिखाया बेफ़िक्र गाता रहा।

Poem on life

हो गया था वो यकीनन आंख से ओझल मेरी,
पर न जाने क्यूँ मुझे फिर भी नजर आता रहा।

दौरे निस्बत में जो उसने की मेरी खातिर दुआ,
आज तक है उन दुआओं का असर आता रहा।

की बडी पुरजोर कोशिश उसने सच को ढाकने की,
झूठ की पतली थी चादर सब नजर आता रहा।

थोडा इसके तोडऩे से थोडा उसके तोडऩे से,
"वीर" मेरा भी भरोसे का हुनर जाता रहा।।

धर्मवीर सिंह राजपूत

1 Comments

Post a comment

Previous Post Next Post