Maa par kavita : Maa poem

भेजा है खुदा ने तुझे फरिश्ते के रूप में
ममता भरी है तेरे कोमल स्वरूप में
मुझको रखा छाया में
खुद को रखा धूप में

Maa par poem

खुदा मिला है मुझे तेरे स्वरूप में
चलना सिखाया जिसने अँगुली पकडके
अब छोड दिया साथ उसका पल भर में
जीने की राह दिखाई मेरे बचपन में
भूल गया मैं सब पल भर में
कांटा लगा मुझे पर दर्द तुझे हुआ
मरहम लगा मुझे पर असर तुझे हुआ
राहत-सी मिली मेरे दिल को जब मैने
तुझे छुआ
गले मिलकर तेरे मेरा हर गम दूर हुआ
फूलों की खूशबू हो सकती है कम
पर तेरा प्यार नही
तेरे बिना जी सकू,
इतना मैं होनहार नहीं

- राहुल जांगिड़

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