तुम्हारे पास आई हूं : मुक्तक

मुक्तक

कि चल के आज खुद से मैं तुम्हारे पास आई हूं
सुनोगे तुम मुझे दिल से यही विश्वास लाई हूं
करेंगे आज बातें हम बिना कोई रुकावट के
करोगे माफ गलती पर यही मैं आश लाई हूं

- इति शिवहरे

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