मरने का दुख

अपने मरने का दुख किसको होता है,
मैं भी सह लेता हूँ तू भी सह लेता है,
सोचो उनके दिल पर क्या बीती होगी,
जिनके युवा बेटों की गर्दन सूली पर होगी,
उनके जीवन मे बस दुखो के रेले होंगे,
जिसने युवा सूतो के शव अपने कंधों पर झेले होंगे,
दुख चाहे जितना हो खुद कट जाता है,
अपने मरने का  ................. ।

कैसे वह सरदार सामने छाती तान खड़ा था,
वीरो में महावीर और शेरो में शेर बड़ा था,
उन गोरो ने सब वीरो को फाँसी का झूला झूला दिया,
भरतवंश के वीरो को मौत की शैय्या सुला दिया
उनके जाने से दुख हम सब को होता है,
अपने मरने का दुख  ............... . ।

Kavita

माँ के आंचल में आसीम वेदना होती है,
अपने लल्ला का रंग देख ओ रोती है,
हो रही जलन है अब उस माँ की छाती में,
रो रो कहती काश तेरे मरने पर आ जाती मैं,
यह मंजर देख के घोर कोलाहल होता है,
अपने मरने का दुख .................... ।

पिता की आंखों से नीर पीर का बहता है,
क्यो छोड़ चले भाई रो रो कर कहता है,
क्यो छोड़ चले हमको करके तुम मनमानी,
भइया बिन तेरे जीना लगता बेईमानी,
रोकर कहती बहना भैया कैसा बंधन रक्षा होता है,
अपने मरने  ................... ।

जो लहू से अपने लाखो गज धरती सिचवा डाली,
जो देश के खातिर चमड़ी अपनी खिंचवा डाली,
ऐसे वीरो के चरणों मे मस्तक खुद झुक जाता है,
जिनकी बदौलत देश आज मुस्काता है,
जब याद शहीदों की आये ये दिल रोता है,
अपने मरने का दुख ही किसको होता है।

- अनुरोध कुमार राजवंश

2 Comments

  1. मजदूर


    सुबह होते ही निकल जाता हूं,
    पैदल कच्चे रास्ते से होते, पक्के रास्ते तक जाता हूं
    हाथ मे कुदाल लिए शहर की ओर बढ़ जाता हूं
    सिर पर तोलिये की पगड़ी मेरी शान बढ़ाती है,
    फट्टे पुराने कपड़े मेरे देह को भांति है

    लेकर उम्मीद चार सौ रुपए की मैं,
    सौ से अधिक की भीड़ में बैठ जाता हूं,
    फिर आते है खरीदार मेरे,
    जो सब्जी की तरह लगाते है भाव मेरे,
    कभी साढ़े तीन तो कभी चार कह कर मुझे ले जाते है,

    फिर खत्म होती है बोली मेरी,
    तब मेरी कुदाल भी मुझसे यह कहते हुए मेरे साथ जाती है,
    चलूंगा तेज़ी से आज,दूंगा आपका साथ
    बस मालिक थकना मत आप

    न धूप की चिंता है मुझे,
    न फिक्र है बरसात की,
    अगर है चिंता फिक्र किसी की,
    तो वो है मेरे परिवार की,
    वो लगा बैठे है मुझसे आश,
    अगर मैं घर नही ले गया अनाज,
    तो भूखे पेट सो जाएंगे वो आज।

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