कौन हु मैं

कौन हु मैं 
कहाँ से मैं आया हूँ
कहाँ है मुझे जाना 
बहुत समय के बाद 

मेने यह पाया 
माटी का पुतला हूँ
भगवान ने मुझे बनाया 
कहा मुझसे 
भगवान का नुमाइंदा है तु 


Sad poem

काम कर वही बन्धे 
जो मैं ‍कराता हूँ
होगा प्यारे वही जो 

मैं  चाहुंगा 
चलता रह तु वक्त़ संग 
यही तेरा कर्म‍ है 
कहाँ से कहाँ है जाना 
यहीं तेरा भ्रम है 
तु यह सोचना बन्द कर गोविंद 
कि कहाँ है मुझे जाना 
इस धरा को कर्म भुमि है बनाना 

-गोविंद कृष्णा जसनाथी

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