Janmashtami shayari || janmashtami poem || krishna janmashtami

तुम आओ हरे कृष्ण फिर लेकर अवतार,
फैल गया है पाप यहां दुष्टों की लगी कतार।

पाप करने में ज्यादा उलझे,
पाप पुण्य की समझ ना समझे,
बदल रहे हैं लोग यहां और बदल रहा संसार,
फैल गया है पाप यहां दुष्टों की लगी कतार।

janmashtami poem

तुम आओ हरे कृष्ण फिर लेकर अवतार,
फैल गया है पाप यहां दुष्टों की लगी कतार।

सार गीता का भूल बैठे हैं,
ले हाथों में शूल बैठे हैं,
ऐसे कर्म है करते जिससे खतरे में घर बार,
फैल गया है पाप यहां दुष्टों की लगी कतार।

तुम आओ हरे कृष्ण फिर लेकर अवतार,
फैल गया है पाप यहां दुष्टों की लगी कतार।

कर्मों पर विश्वास नहीं है,
सब्र लोगों के पास नहीं है,
डूबती है नैया सबकी नहीं लगती है पार,
फैल गया है पाप यहां दुष्टों की लगी कतार।

janmashtami par kavita

तुम आओ हरे कृष्ण फिर लेकर अवतार,
फैल गया है पाप यहां दुष्टों की लगी कतार।

मानव धर्म को अपनाते हैं,
वो ही बस तुझको पाते हैं,
मानवता है भूले आज और भूल गए संस्कार,
फैल गया है पाप यहां दुष्टों की लगी कतार।

तुम आओ हरे कृष्ण फिर लेकर अवतार,
फैल गया है पाप यहां दुष्टों की लगी कतार।

- Yogendra jeengar Yash

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