निकल पड़ा हूँ सफर में

निकल पड़ा हूँ सफर पे मैं तन्हा
न मंजिल का पता है और न रस्ते का
दिल मे उम्मीदों की एक शम्मा जलाए
साथ दुवाओं का एक पहाड़ बनाए

निकला हूँ हर मुश्किल से टकराने के लिए
घरवालो को हर खुशी मुहैया कराने के लिए
अखिरी साँस भी मैं उनके नाम कर दूँ
माँ बाप की खुशी के लिए, 
अपनी जिंदगी तमाम कर दूँ

Hindi kavita

धूप उनपर पड़े तो साया बन जाउंगा मैं
वक्त पड़ा कभी तो आया बन जाउंगा मैं
गमो की धूप से उनको बचाने के लिए
घर में खुशियों का दीप जलाने के लिए

निकल पड़ा है सफर पे तन्हा 'इरफान'
अपने इस कर्तव्य को  निभाने के लिए !!

- मोहम्मद इरफान

Post a Comment

Previous Post Next Post