Hindi diwas kavita|hindi diwas poem

इसमें देश की मिट्टी की खुश्बू सी महकती है,
देश प्रेम की भावना इससे और ज्यादा निखरती है,

शब्द-शब्द में इसके जैसे एक सम्मान झलकता है,
वीर सपूतों की वाणी में इससे जोश उगलता है,

Hindi diwas poem

वीर रस, शृंगार रस सारे रसों की ताकत है,
इंग्लिश विंग्लिश जो भी बोलो हमें इसी की आदत है,

हम भारत के लाल सदा इसको अपनाते आए हैं,
बचपन से ही हमें राष्ट्र के लिए सिखाते आए हैं,

वर्णमाला को सिखा है हमने बचपन के खेलों में,
कैसे भूलें इसके दिन हम दुनिया के झमेलों में,

ये संस्कृति बनी हुई है ये आधार जरूरी है,
इसमें अवरोध कई बने इसमें सुधार जरूरी है,

भारत माता के माथे की बिंदी है,
राष्ट्रवाद के लिए जरूरी हिंदी है।

- कवि योगेन्द्र जीनगर "यश"

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