गुरु की महिमा

गुरुओं की महिमा जग में बड़ी अपार
लिखने बैठूं गुरु माया का न पाया पार

सम्पूर्ण जगती को पृष्ठ बना दूँ अगर
सम्पूर्ण जलधि को स्याही बना दूँ मगर

Guru ki mahima

गुरु की उत्कृष्टता का बखान न कर सकूँ
न गुरु की मृदुल काया का सार कह सकूँ

ईश्वर की छाया सी कोमल देह लेकर आये
ईश्वर से भी उच्च स्थान लेकर इस जगत में छाये

बांधू कैसे अल्फाजों में इस महान चरित्र को
किस तरह आभार व्यक्त कर दूँ आपके कृतित्व को

अबोध को साक्षरता का ज्ञान करा मनुष्य की श्रेणी
भटके हुए को मार्गी बना ज्योतिर्मय कर दी वेदी

यूँ प्रकाशित रवि से अधिक प्रकाशवान है गुरु
सागर से विकराल हो हृदय जिसका है गुरु

क्या लिख पाउंगी गुरु की कृतज्ञता का गान
तुक्ष्य सी कविता मेरी चरणों में अर्पित बखान

- नेहा शुक्ला

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