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Sunday, 30 September 2018

Four lines : चार पंक्तियां

Four lines : चार पंक्तियां

Char panktiyan

नई हवाओं की दिशा मेरे करीब आकर मुड़ गई,
बिना राहत दिए गैरों के आँधियो संग जुड़ गई,
मेरे आँगन के एक पुराने पेड़ ने अपने आप को झकझोर दिया,
पत्तियां बोली तेरे सुकून के लिए मैंने खुद को तोड़ दिया।

- गौरव अग्रहरी

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