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Tuesday, 11 September 2018

लक्ष्य : आज की कविता

* लक्ष्य *

असफलताओं से हार कर
बैठी थी वो मायूस - सी
तभी मन की आवाज सुनाई दी

असफलताओं से हारकर
पीछे कदम नही हटाना है
उज्ज्वल भविष्य पुकारे तुझे
लक्ष्य की राह पर चलते ही जाना है ।

Lakshya

खत्म ना होने पाये
ये सफर जिंदगी का
लक्ष्य को जी ले आज ही
कल तो उसे जरूर ही पाना है
हजारो मुश्किले आए भी अगर
राह से नही डगमगाना है ।

तोड़ दे हर वो एक दिवार राह की
काँटो पे भी चलकर राह नयी बनाना है
इतने मे साथी के बोल
कानो मे गुनगुनाये

"तुम पा सकती हो लक्ष्य तुम्हारा
तुम मे वो काबिलियत है वो गुण है
डटकर खडी रहो राह पर अपनी
आखिर तुम्हे चुकाना अपनों का ऋण है
होसला जाग उठा उसका
मन से फिर आवाज आई

तेरे लिये उसने भी
दि है सुख की कुर्बानी
लक्ष्य गर चाहे तू पा ले
मगर उसने तो तेरे
लक्ष्य मे ही सबकुछ पा लिया
नही चाहिये उसे धन दौलत

तेरा लक्ष्य ही उसकी चाह है
तोड दे वह पिंजरा जिसने तु जकडी है

उसके लिए जीना ही बस
यही एक तेरी राह है।

- गायत्री शर्मा 

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