बारिश का कहर

उतरा है फ़लक से,  लेकर हाहाकार।
क्रोधित बहुत है आज,  कोमल जल की धार ।। 

Keral badh kavita

आज जमी पर मचा हुआ है,  एक ऐसा कोहराम।
केरल का हर एक इन्सा,  है बडा परेशा।।

रख सलामत ऐ खुदा , जीवन जीव जन्तु और मानव का।
कर दया थामले प्रभा , तेज बरस्ते बेहते पानी का।।
                              
- कमलेश कुमारी 

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