आज एक शानदार रचना

तुझ काे पाने के लिए, 
मैं ने क्या नहीं किया,
क्या किया रे क्या किया,
मुझ काे भी बता,
बिल्डीगाें के बाेर्ड पर 
काली काली राेड पर
बाईक के फरन्ट पर
अपनी शर्ट के बेक पर


नाम तेरा लिख दिया,
वाव, तू ने क्या किया
अाैर तू ने क्या किया, 
सुरमई से बाल पर
चमपई से गाल पर,
हुस्न बेमिसाल पर
रेशमी रूमाल पर,
गाीत लिख दिया
वाव, तू ने ये किया

अब नहीं रहा तुझ से
कुछ गिला,
बेजुबा उमंग काे मिल
गई जुबा,
मैं भी तेरे साथ हूं
चाहे चल जहाँ, 
तुझ काे पाने।

- माे. शरीफ

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