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Saturday, 15 September 2018

2 शानदार मुक्तक

2 शानदार मुक्तक

कि चल के आज खुद से मैं तुम्हारे पास आई हूं
सुनोगे तुम मुझे दिल से यही विश्वास लाई हूं
करेंगे आज बातें हम बिना कोई रुकावट के
करोगे माफ गलती पर यही बस आश लाई हूं

Muktak hindi

चले आओ अभी मोहन, तुम्हें मीरा बुलाती है
कहां अब द्रोपदी सबको, यहां पीड़ा बताती है
दुशासन हैं यहां कितने बढ़ी है कंस की संख्या
कि आओगे कभी मोहन, इति आशा लगाती है

- इति शिवहरे औरैया

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