तुकांत कविता क्या है और कैसे लिखें- tukant kavita kya hai

नमस्ते दोस्तों, आप सभी का स्वागत है हमारे आज के लेशन में। आज के लेशन में हम पढ़ेंगे कि तुकांत कविता क्या होती है और इसे कैसे लिखते हैं। तुकांत कविता तुकांत के आधार पर लिखी जाती है। अगर आपने हमारा लेशन तुकांत क्या है नहीं पढ़ा है, तो आप जरूर पढ़ लें।


तुकांत वे शब्द होते हैं जो कविता की हर पंक्ति के अंत में लिखें जाते हैं और उनकी विशेषता ये होती है कि हर पंक्ति में वो एक समान लय के होते हैं। एक शब्द के समान तुकांत को समतुकांत कहा जाता है। जैसे- जतन शब्द के तुकांत होंगे- वतन,दफन,चमन आदि।

tukant kavita kya hai


तो दोस्तों, आप समझ गए होंगे कि तुकांत शब्द कौनसे होते हैं। ऐसे ही शब्दों के माध्यम से लिखी गई कविता तुकांत कविता कहलाती है। तुकांत कविता में केवल हमें तुकांत शब्दों का ही ध्यान नहीं रखना होता बल्कि हमें भावनाओं का भी ध्यान रखना होता है। इसके अलावा अगर आप इसे छंद में लिख रहे हैं, तो आपको छंद का भी ध्यान रखना होगा।

उदाहरण के लिए आपके सामने एक तुकांत कविता प्रस्तुत है-

मेरा हर दिन खास नहीं होता,
क्योंकि तू रोज़ मेरे पास नहीं होता,
हर कोई मुझे देखकर रोता है,
मुझे मेरी हालत पर अफसोस होता है,
थोड़ा क्यों उसे बेशुमार मिलना चाहिए,
कोई प्यार करें तो उसे प्यार मिलना चाहिए...

इस कविता में तुकांत शब्दों का प्रयोग किया गया है और दो-दो पंक्ति में समतुकांत का प्रयोग किया गया है।
तो दोस्तों, उम्मीद करता हूं आपको हमारा ये लेशन पसंद आया होगा। अधिक जानकारी के लिए आप हमारा लेशन कविता कैसे लिखें जरूर पढ़ें। मिलते हैं फिर एक ऐसे ही लेशन के साथ तब तक लिखते रहिए और सीखते रहिए।

-लेखक योगेन्द्र जीनगर ‘‘यश‘‘


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