Rakshabandhan poem -

अनंत प्रेम से बना है ,संगम।
एक  डोर से जुड़ा है, बंधन।
प्रेम है , मेरा इतना सक्षम।
भर दे  शक्ति  भुजाओ में हरदम।
कभी न होगा  तुम्हारा  अहित।
कामना करू मैं साधना रहित।

Rakshabandhan kavita

रेशम के धागे से बना है, भाई-बहन का बंधन
ऐसा करू  अभिनंदन , माथे पे लगा के  चंदन।
मैं बाँधु रक्षा बंधन , मैं बाँधु रक्षा बंधन।
मेरे भाई का अभिनंदन, माथे पे सजा दू चंदन।
मैं बाँधु रक्षा बंधन , मैं बाँधु रक्षा बंधन।

छोटा प्यारा नन्हा सा , माँ का दुलारा था।
आया तब हाथों में मेरे , जब छूटा माँ का दामन था।
बिछड़ कर माँ के आँचल से , न जीने का निवारण था। दर्द मेंभी खुशी का आलम,बस मेरे भाई के कारण था।
भुल कर सारे गमो को ,मैंने दिल से काम लिया । 

जीना है नन्ही जान के लिए ,जिसने दामन थाम लीया।
आने ना दी उसने आँसू ,कभी भी मेरी आँखो से।
उसने भाई का धर्म निभाया , खेलकर अपनी जानो से।
गरीमा है, रेशम की , ये दिव्य प्रेम का है , बंधन।
माथे पे लगाके चंदन ,फूलो से करू अभिनंदन।
मैं बाँधु रक्षा बंधन, मैं बाँधु रक्षा बंधन।

- रिकूं कुमार जैसवारा

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