जिंदगी रास्ता खोलेगी वक़्त-ए-तजुर्बा दे जाएगी,        
ख़ामोशी की रात आएगी सब कुछ बहा कर ले जाएगी।।
  
नजरों के नजरिये से सारे नज़ारे देख लूँ,                                      
कल का क्या भरोसा जिंदगी कहाँ ले जाएगी।।

कायम है ये अँधेरा रास्ता कोई खोज लूँ,              
सूरज की नव किरणें जाने कहाँ ले जाएँगी।।

How to write

जागती आँखें ,पीपल, आँगन, चिड़ियाँ सभी,
अब की आँधी ये भी उड़ा ले जायेगी।।

हवा के इस दौर में सब कुछ खो गया,
बचा हुआ सब कुछ नज़र-ए-सुर्मा ले जाएगी।।

जाती हुई नज़रों के नज़रिये के नज़ारों का सलाम,
ये बचपने सी जिंदगी लुत्फ़-ए-खता ले जाएगी।।

- नम्रता मिश्रा 

1 Comments

Post a comment

Previous Post Next Post