"प्रेरणा "

सुबह होते ही सूरज पूरब से निकल आता है दिन भर समय से कर्म पथ पर चलते हुए शाम होते ही पश्चिम में अस्त हो जाता है जिस तरह अपने समय से
दिन और रात होती है ठीक उसी तरह, मैं भी अपने समय से आगे बढ़ने की कोशिश करता हूँ कुछ बनने की कोशिश करता हूँ।

Moral
तितलियों को पकड़ने से हाथों में रंग छोड़ जाती है जिस तरह मेहंदी हरी होने के बावजूद भी हाथों में लाली दे जाती है ठीक उसी तरह, मैं भी इस दुनिया में अपना नाम छोड़ जाने की कोशिश करता हूँ कुछ बनने की कोशिश करता हूँ
-गौरब कुमार

1 Comments

  1. Mai apni rachana prakashit karvana chahta hu .kya karana hoga

    ReplyDelete

Post a comment

Previous Post Next Post