किस्मत कोशने के लिए कोशो दूर चलना पडा
जिसके काबिल नही उस राह से गुजरना पडा |

जमाने ने तो बहुत ठोंकरे दी थी हमें
तुम्हें क्या पता काँटो की राह चलना पडा |

Waqt shayari

बे रंग सी रुत को देख क्यू मरे
खूब सूरती को देख चलना पडा |

हम ने उस ओर से हाथ थामा था
हमें इस ओर अकेले निकलना पडा |

- राहुल प्रजापति राम

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