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Wednesday, 2 January 2019

Kavita Muje Jina Sikha De

Kavita Muje Jina Sikha De

जताऐ बिना माध्यम बनू 
बन छायादार सबको छाया दू 
तरु कुछ ऐसा सिखा दे 
सच्चा परोपकार सिखा दे 
ऐसा मुझे जिना सिखा दे 

नदिया कुछ ऐसा सिखा दे 
निरन्तर चलने वाली कला सिखा दे 
छोड़ पहचान अपनी 
परिवार में मिलना सिखा दे 
उपकार कुछ उनके उतारू 
ऐसा मुझे  जिना सिखा दे 


पवन तू  एक कला सीखा दे
बिना दिखे कराना अहसास सिखा दे 
तारा हु जिनकी आखो का 
मेरे हिस्से की प्राण वायु उन्हें देना सिखा दे
 ऐसा मुझे  जिना सिखा दे 

धीरज धरा से सिखा लू 
मित्र -शत्रु समान रख दू 
हे दिल दुखाने वाले हजार
दिल से माफ़ कर सकू 
ऐसा मुझे  जिना सिखा दे 

दिनकर कुछ ऐसा सीखा दे 
अँधेरा हटाना मुझे बतलादे 
किरणे बन किसी के जीवन में छाऊ
कर्तव्य अपने निभा पाऊ 
ऐसा मुझे  जिना सिखा दे 

प्रकृति मुझे जीवन का सार सिखा दे
 सब -कुछ समाप्त होने पर पुनः निर्माण की कला सिखा दे
तेरी तरह रहना सिखा दे 
ऐसा मुझे  जिना सिखा दे

- बलवंत देसाई

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