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Wednesday, 7 November 2018

Diwali par kavita

Diwali par kavita

दिल में नयी नयी उमंगे और नया नया प्यार लाता है,
अंधेरी रात को जगमग करने वाली बहार लाता है,
खिल जाते हे सदियों से मुर्झाये चेहरे भी इस दिन,
एक प्यारी सी मिठास ये दिवली का त्यौहार लाता है....


दिवली पर हम आंगन में रंगोंलिया बनाते है,
नये नये कपड़े पहनकर खुशिया मनाते है,
हर कोई यहि कहता है ये त्यौहार है खुशियो का,
लेकिन फ़िर भी कई लोग इस दिन नफ़रते निभाते हैं....

खुद को और दूसरों को अपनेपन का एहसास करा कर,
अपने अंदर की बुराईयो को भगादो तुम डरा कर,
सबको मालूम है दिवाली भी हम मनाते है क्योंकि,
इस दिन प्रभु श्री राम घर आये थे बुराई को हरा कर....


दुश्मन हो या दोस्त सबको साथ बुलाकर,
अपने मन मंदिर में प्यार का दिया जलाकर,
क्यों ना इस बार दिवाली पर हम बाँटे खुशिया,
अपने अंदर से सारी नफ़रत और बेर भुलाकर.... 

तेरे मेरे इसके उसके सबके यार से बोलो,
इन घटाओ से और कुदरत की इस बहार से बोलो,
भुल जाओ तुम क्या होता है लड़ाई झगड़ा,
इस बार Happy Diwali सिर्फ़ और सिर्फ़ प्यार से बोलो....

- Rahul Panchal

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