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Wednesday, 31 October 2018

जिंदगी की भागदौड़ कविता

जिंदगी की भागदौड़

भाग रहे सभी जिंदगी की इस भागदौड़ में
रेलवे एसएससी बैंक की होड़ में

अव्वल वही जिसके पास पैसा है
या दिमाग उसका न्यूटन फैराडे जैसा है


बी. ए. बी. एस. सी. बी. कॉम.
भी लगे सफाई कर्मचारी की लाइन में 

एम. ए. एस. एस. सी. एम. कॉम.
भी लगे सफाई कर्मचारी की लाइन में

कर रहे जो एसएससी बैंक की तैयारी प्रेजेंट टाइम में
पढ़ते पढ़ते आंखे लाल हो गई युवाओं की

पर दूर दूर तक खबर नही है नौकरी की छांव की
मारे चिंता के गिर गए सर के सारे बाल
नोच लिया बदन सारा तन से तारे खाल
डिग्रियों का लगाये बैठे हैं ढेर
सोच के यही अरे कोई तो
सुनेगा हमारी भी देर सवेर
पर कोई नही इनकी सुनने वाला है

लगता है दाल में कुछ काला है
लगता है दाल में कुछ काला है

Suryabhan singh nirbhay

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