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Wednesday, 5 September 2018

Kaha se me aya hun:poem

कौन हु मैं

कौन हु मैं 
कहाँ से मैं आया हूँ
कहाँ है मुझे जाना 
बहुत समय के बाद 

मेने यह पाया 
माटी का पुतला हूँ
भगवान ने मुझे बनाया 
कहा मुझसे 
भगवान का नुमाइंदा है तु 


Sad poem

काम कर वही बन्धे 
जो मैं ‍कराता हूँ
होगा प्यारे वही जो 

मैं  चाहुंगा 
चलता रह तु वक्त़ संग 
यही तेरा कर्म‍ है 
कहाँ से कहाँ है जाना 
यहीं तेरा भ्रम है 
तु यह सोचना बन्द कर गोविंद 
कि कहाँ है मुझे जाना 
इस धरा को कर्म भुमि है बनाना 

-गोविंद कृष्णा जसनाथी

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